तू ख़ुद की खोज में निकल
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है ,
तू चल तेर वजूद की
समय को भी तलाश है
जो तुझसे लिपटी बेड़ियां
समझ न इनको वस्त्र तू
ये बेड़ियां पिघाल के
बना ले इनको शस्त्र तू
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
चरित्र जब पवित्र है
तो क्यों है ये दशा तेरी
ये पापियों का हक़ नहीं
की ले परीक्षा तेरी
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है ,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
जला कर भस्म कर उसे
जो क्रूरता का जाल है
तू आरती की लौ नहीं
तू क्रोध की मशाल है
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
चूनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कंपकंपाएगा
अगर तेरी चूनर गिरी
तो एक भूकंप आयेगा
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
:- तनवीर ग़ाज़ी
तू किस लिए हताश है ,
तू चल तेर वजूद की
समय को भी तलाश है
जो तुझसे लिपटी बेड़ियां
समझ न इनको वस्त्र तू
ये बेड़ियां पिघाल के
बना ले इनको शस्त्र तू
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
चरित्र जब पवित्र है
तो क्यों है ये दशा तेरी
ये पापियों का हक़ नहीं
की ले परीक्षा तेरी
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है ,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
जला कर भस्म कर उसे
जो क्रूरता का जाल है
तू आरती की लौ नहीं
तू क्रोध की मशाल है
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
चूनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कंपकंपाएगा
अगर तेरी चूनर गिरी
तो एक भूकंप आयेगा
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
:- तनवीर ग़ाज़ी
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