संदेश

हर कदम मेरा जीत की ओर होगा

बाधाओं के शिखर होंगे , मुश्किलों का कहर होगा , परेशानियों का ढेर होगा , फिर भी हर कदम मेरा जीत की ओर होगा । राह में गहरे गड्ढे भी होंगे , लहरों में मुझे डुबाने का शोर भी होगा , हवाओं में मुझे गिराने का जोर भी होगा ,  फिर भी हर कदम मेरा जीत की ओर होगा । असफलताओं के ढेर भी होंगे ,  संकल्प हिलाने को मेरा  बाधाओं का प्रयास भी बेजोर होगा , मेरे गिरने पर हसने का कुछ  को इंतजार भी जरूर होगा , फिर भी हर कदम मेरा जीत की ओर होगा । असफलताओं , बाधाओं से ना मेरे सपने खंडित होंगे ,  हर बार गिरने पर मेरा उठने का प्रयास जरूर होगा , हैं यकीन मेरी सफलता का भी एक दिन  शोर होगा ,  क्योंकि हर कदम मेरा जीत की ओर होगा ।

मैं इंसान हूं

मैं हिंदू हूं , जो मस्जिद के आगे सिर झुकाता है  जो गुरूद्वारे में भी माथा  टेकने  जाता है जो चर्च में भी कैंडल जला कर आता है  जो मंदिर में दिया जलाने जाता है क्योंकि मैं हिंदू ही नहीं भारतीय भी हूं । मैं मुस्लिम हूं , जो मंदिर के आगे झुक जाता हैं जो जोर- शोर से लोहडी भी मनाता हैं जो क्रिसमस में भी खुशियां मनाता हैं जो नमाज़ अदा करने मस्जिद भी जाता हैं क्योंकि मैं मुस्लिम ही नहीं भारतीय भी हूं। मैं सिक्ख हूं , जो ईस्टर भी मनाता हैं  जो क़ुरान पढ़ना भी जानता हैं जो होली में रंग भी लगाता हैं जो वैशाखी भी मनाता हैं  क्योंकि मैं सिक्ख ही नहीं भारतीय भी हूं। मैं ईसाई हूं ,  जो गुरुनानक के कदमों पर चलता हैं जो गीता का ज्ञान भी ग्रहण करता हैं  जो ईद भी मनाता हैं जो बाइबिल भी पढ़ता हैं क्योंकि मैं ईसाई ही नहीं भारतीय भी हूं। मैं धर्म हूं , जो लिंग, जाती की सीमाओं से परे हैं इंसानियत की जिसके अंदर गहरी जड़े हैं जो दिल में प्यार , होठों पर मिठास रखता हैं जो हर बुराई से सबके साथ मिलकर लड़ता हैं क्योंकि मैं धर्म ही नहीं इंसान भी हूं ।

चलो एक बार फिर

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की न तुम मेरी तरफ़ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों में न ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्मकश का राज़ नज़रों से चलो झक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जलवे पराए हैं मेरे हमराह भी रूसवाइयां हैं मेरे माझी की तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साये हैं चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों तार्रुफ़ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा वो  अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों             :- साहिर लुधियानवी

सबसे खतरनाक

मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती बैठे- बिठाए पकड़े जाना बुरा तो हैं सहमी- सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो हैं पर सबसे खतरनाक नहीं होता कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है किसी जुगनू की लौ में पढ़ना बुरा तो है मुट्ठियां भींचकर बस वक्त निकाल लेना बुरा तो है सबसे खतरनाक नहीं होता सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना न होना तड़प का सब सहन कर जाना घर से निकलना काम पर और काम से लौटकर घर आना सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो आपकी निगाह में रुकी होती है सबसे खतरनाक वह  आँख होती है जो सब कुछ देखती हुई भी जमी बर्फ होती है जिसकी नज़र दुनिया को मुहब्बत से चूमना भूल जाती है जो चीज़ों से उठती अंधेपन की भाप पर ढुलक जाती है जो रोज़मर्रा के क्रम को पीती है एक लक्ष्यहीन दूहराव के उलटफेर में खो जाती है सबसे खतरनाक वह चाँद होता है जो हर हत्याकांड के बाद वीरान हुए आँगनों में चढ़ता है पर आपकी आँखों को मिर...

तू ख़ुद की खोज में निकल

तू खुद की खोज में निकल तू किस लिए हताश है , तू चल तेर वजूद की समय को भी तलाश है जो तुझसे लिपटी बेड़ियां समझ न इनको वस्त्र तू ये बेड़ियां पिघाल के बना ले इनको शस्त्र तू तू खुद की खोज में निकल तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है चरित्र जब पवित्र है तो क्यों है ये दशा तेरी ये पापियों का हक़ नहीं की ले परीक्षा तेरी तू खुद की खोज में निकल तू किस लिए हताश है , तू चल तेरे वजूद की  समय को भी तलाश है जला कर भस्म कर उसे जो क्रूरता का जाल है तू आरती की लौ नहीं तू क्रोध की मशाल है तू खुद की खोज में निकल तू किस लिए हताश है तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है चूनर उड़ा के ध्वज बना गगन भी कंपकंपाएगा अगर तेरी चूनर गिरी तो एक भूकंप  आयेगा तू खुद की खोज में निकल तू किस लिए हताश है तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है              :- तनवीर ग़ाज़ी                

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है चढ़ती दीवारों पर , सौ बार फिसलती है मन का विश्वास रगों में साहस भरता है चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती असफलता एक चुनौती है , स्वीकार करो क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती                              :- सोहनलाल द्विवेदी

हो गई है पीर पर्वत - सी

हो गई है पीर पर्वत - सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार , परदों की तरह हिलने लगी शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर ,हर गली में , हर नगर , हर गांव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश है कि ये सुरत बदलनी चाहिए मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग , लेकिन आग जलनी चाहिए                                                :-    दुष्यंत कुमार